शूद्रो का राज आने वाला हैं रोक सको तो रोक लो - स्वामी विवेकानंद Watch full till end

25 Mar 2018   09:23   312
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ईसाइयों ने पश्चिम के देशों में वर्ण व्यवस्था को लेकर बड़ा दुष्प्रचार किया था, इसलिए ही स्वामी विवेकनंद को इन शूद्र आदि शब्दों का सहारा लेना पड़ा। ब्राह्मण ज्ञान का, क्षत्रिय वीरता का, वैश्य धनशक्ति का और शूद्र कला व शिल्प का प्रतीक है। इन्हें यहाँ वर्ण या जाति से जोड़ना बिल्कुल भी ठीक नहीं। इस घटना का जिक्र Sister Christine ने किया है, प्रसंग 1896 का है। स्वामी निखिलानन्द ने अपनी पुस्तक ‘विवेकानंद की जीवनी’ में अध्याय ‘Last Visit to the West’ के ठीक अंत में भी इसका उद्धरण दिया है।
पुस्तक यहाँ देखी जा सकती है:
http://www.vivekananda.net/PDFBooks/BiographybyNikhilananda.pdf
Swami Vivekananda was totally against all types of caste system. Brahmin stands for valor, Kshatriya for valor, Vaishya for monitory power and Shudra for arts and crafts. We cannot take these words for castes.
Editing and producing by Baljit Singh
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